दोस्तों मैं ये मानता हूं ,कि कुछ रचनाएँ अप्रत्यक्ष रूप से ईश्वर ही करता है,मनुष्य तो उसके हाथ का औजार बन जाता है.क्यों कि कोई कलाकार खुद चाहकर भी उस चमत्कार को दोहरा नहीं पाता . ऐसी ही एक कृति है 'अल्केमिस्ट'.'पाउलो कोएल्हो' ने इस अद्भुत किताब को 1988 में पुर्तगाली भाषा में रचा था,तबसे अबतक 56 भाषाओँ में इसका अनुवाद हो चुका है,कई पीढ़ी इसे पढ़ चुकी है और अभी सफ़र ज़ारी है.बहरहाल इसकी तारीफ़ में कई पन्नों में कर सकता हूं.ये तो गूंगे का गुड है,इस किताब के कुछ अंश उपरोक्त लिंक पर उपलब्ध हैं .http://www.hindisahityadarpan.in/2014/01/12-quotes-from-the-alchemist-in-hindi.html
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